Mar 21, 2026

नेपाल एपीएफ और भारतीय सेना में समन्वय: काली नदी राफ्टिंग अभियान ने बढ़ाई आपसी समझ और दोस्ती

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भारत-नेपाल सीमा पर बहने वाली काली नदी में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवानों ने अदम्य साहस और अनुशासन का परिचय देते हुए 150 किलोमीटर लंबा राफ्टिंग अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया। इस रोमांचक अभियान के जरिए जवानों ने न केवल अपनी शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन किया, बल्कि आपदा प्रबंधन और टीम वर्क की उत्कृष्ट मिसाल भी पेश की। सशस्त्र सीमा बल के 36 सदस्यीय दल ने “व्हाइट वाटर रिवर राफ्टिंग अभियान 2026” के तहत 16 मार्च को पिथौरागढ़ से अपनी यात्रा शुरू की थी। कठिन और चुनौतीपूर्ण जलधारा को पार करते हुए यह दल टनकपुर-पूर्णागिरी मार्ग स्थित बूम घाट पहुंचा, जहां अभियान का समापन हुआ। काली नदी भारत और नेपाल के बीच प्राकृतिक सीमा का कार्य करती है, जिससे इस अभियान का महत्व और भी बढ़ जाता है।

समापन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में एसएसबी के महानिरीक्षक अमित कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने जौलजीबी से बूम तक राफ्टिंग कर पहुंचे दल का स्वागत करते हुए सभी अधिकारियों और जवानों को उनकी उपलब्धि के लिए बधाई दी। इस अभियान का नेतृत्व एसएसबी अल्मोड़ा क्षेत्र के डीआईजी सुधांशु नौटियाल ने किया। आईजी अमित कुमार ने इस अवसर पर कहा कि इस तरह के साहसिक अभियान जवानों में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और आपदा से निपटने की तैयारी को मजबूत करते हैं। उन्होंने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य केवल रोमांच तक सीमित नहीं है, बल्कि जवानों को कठिन परिस्थितियों में कार्य करने के लिए प्रशिक्षित करना भी है। खास बात यह रही कि इस अभियान में पुरुषों के साथ महिला जवानों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और सफलता हासिल की। कार्यक्रम में एनएचपीसी बनबसा के महाप्रबंधक ऋषि रंजन आर्य, नेपाल एपीएफ फोर्स के अधिकारी, सेना के अफसर सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने एसएसबी के इस प्रयास की सराहना की और इसे भारत-नेपाल मैत्री व सहयोग का प्रतीक बताया। समापन समारोह के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भी सभी का मन मोह लिया। एसएसबी के जवानों और स्कूली बच्चों ने उत्तराखंड, राजस्थान, पंजाब और मणिपुर की संस्कृति को दर्शाती रंगारंग प्रस्तुतियां दीं, जिससे माहौल उत्साहपूर्ण हो उठा। गौरतलब है कि एसएसबी सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ समय-समय पर इस तरह के साहसिक और प्रशिक्षण आधारित अभियानों का आयोजन करता रहता है। यह अभियान न केवल जवानों की क्षमता को परखने का माध्यम बनता है, बल्कि उन्हें हर चुनौती के लिए तैयार भी करता है। कुल मिलाकर, काली नदी में सफल राफ्टिंग अभियान ने एसएसबी के जांबाजों के साहस, समर्पण और टीम भावना को एक बार फिर साबित कर दिया है।