Apr 07, 2026

उत्तराखंड सरकार का मास्टरप्लान: वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम के जरिए प्रशासनिक पारदर्शिता लाने की है कोशिश

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देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राज्य के सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए वार्षिक स्थानांतरण सत्र 2026-27 की प्रक्रिया पर मुहर लगा दी है। शासन की ओर से जारी ताजा आदेशों के अनुसार, इस वर्ष भी सभी तबादले 'उत्तराखंड लोक सेवकों के लिए वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम, 2017' के कड़े प्रावधानों और तय समय-सारणी के भीतर ही किए जाएंगे। शासन ने स्पष्ट किया है कि स्थानांतरण प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी या एक्ट के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सरकार ने कर्मचारियों और अधिकारियों के वार्षिक तबादला सत्र 2026-27 के लिए आदेश जारी कर दिए हैं। शासन ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि सभी तबादले उत्तराखंड लोक सेवकों के लिए वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम 2017 की धारा 23 के तहत तय की गई समय-सारणी के अनुसार ही किए जाएंगे। कार्मिक एवं सतर्कता विभाग की ओर से जारी शासनादेश में कहा गया है कि सामान्य स्थानांतरण प्रक्रिया पूर्ण पारदर्शिता और निर्धारित समयसीमा में पूरी की जाए।

समय-सारणी के मुख्य बिंदु:
31 मार्च 2026 तक सभी विभागों के विभागाध्यक्षों द्वारा कार्यस्थलों का मानक के अनुसार चिन्हीकरण पूरा कर लिया जाना चाहिए।
1 अप्रैल 2026 तक मंडल और जिला स्तर पर तबादला समितियां गठित कर दी जानी चाहिए।

अधिकतर विभागों में तबादला समितियां पहले ही गठित हो चुकी हैं। अब इन समितियों के माध्यम से कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादलों की प्रक्रिया शुरू होगी। शासन ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि तबादलों के दौरान कार्मिक एवं सतर्कता विभाग द्वारा समय-समय पर जारी शासनादेशों के प्रावधानों का सख्ती से पालन किया जाए। इससे तबादला प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी हो सकेगी। वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम के तहत हर साल तय समय-सारणी के अनुसार तबादले कराने का प्रावधान किया गया है, ताकि कर्मचारियों को अनिश्चितता का सामना न करना पड़े और प्रशासनिक कार्यों में भी सुचारुता बनी रहे। सरकारी कर्मचारियों में इस आदेश से राहत की भावना है क्योंकि अब तबादले बिना किसी देरी और मनमानी के तय समय पर होंगे।