राज्यसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर बहस: खड़गे ने छात्रों के लिए न्याय पर उठाए सवाल

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नई दिल्ली। राज्यसभा में गुरुवार को एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने परीक्षा में पेपर लीक के मुद्दे के साथ.साथ दिल्ली में छात्रों के आंदोलन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने छात्रों पर पैलेट गन के इस्तेमाल, चोट लगने और कई छात्रों के घायल होने का दावा करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और उनसे जिम्मेदारी लेने की मांग की। खड़गे के बयान के बाद सदन में जोरदार हंगामा हुआ। सत्ता पक्ष की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने खड़गे की टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सदन में असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सभापति से खड़गे की टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से हटाने की मांग की। इसके बाद खड़गे ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने किसी भी असंसदीय शब्द का इस्तेमाल नहीं किया है और उनके बयान का आशय जनशक्ति और विद्यार्थियों से था। एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने संबोधन की शुरुआत कविता की कुछ पंक्तियों से की। उन्होंने कहा, ‘पेपर चुराने वाले बचते रहे, मेहनत करने वाले पिटते रहे, ये कैसा न्याय, ये कैसी रीत, गुनहगार हंसते रहे, मासूम सिसकते रहे।’ खड़गे ने कहा कि देश में लाखों छात्र मेहनत कर परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाओं के कारण उनकी मेहनत और भविष्य पर असर पड़ता है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं। उन्होंने दिल्ली में छात्रों के आंदोलन का जिक्र करते हुए दावा किया कि पुलिस कार्रवाई में कई छात्र घायल हुए। खड़गे ने कहा कि किसी छात्र के हाथ में चोट आई, किसी के कान में चोट लगी और किसी का पैर टूट गया। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि इन घटनाओं की जिम्मेदारी कौन लेगा। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि इन घटनाओं की जिम्मेदारी गृह मंत्री की है।

‘बंद कमरे में बहुत दिन नहीं छिप सकते’ बयान पर सदन में हंगामा
अपने संबोधन के दौरान खड़गे ने सत्ता पक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा कि सरकार बंद कमरे में बैठकर उनकी बात सुन रही होगी, लेकिन लंबे समय तक बंद कमरे में छिपा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि एक दिन जनशक्ति उन्हें बाहर लेकर आएगी और जनता के सामने जवाब देना पड़ेगा। खड़गे के इस बयान के बाद सत्ता पक्ष के सदस्यों ने आपत्ति जताई और सदन में हंगामा शुरू हो गया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने खड़गे की टिप्पणी पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष के नेता को अपने संबोधन के दौरान तर्क के साथ बात रखनी चाहिए और भावावेश में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, जिन्हें असंसदीय माना जा सकता है। नड्डा ने सभापति से खड़गे के बयान में इस्तेमाल किए गए कथित असंसदीय शब्द को सदन की कार्यवाही से हटाने की मांग की।

खड़गे ने दी सफाई, बोले- मेरा मतलब जनशक्ति से था
सत्ता पक्ष की आपत्ति के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने बयान पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि वह कभी भी सदन में असंसदीय भाषा का इस्तेमाल नहीं करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके बयान में ‘हम’ का मतलब जनशक्ति और विद्यार्थियों से था। खड़गे ने कहा कि उनका आशय यह नहीं था कि विपक्ष किसी को पकड़कर या खींचकर बाहर लाएगा। उनका कहना था कि जनता और विद्यार्थियों की ताकत सरकार को जवाबदेही के लिए मजबूर करेगी। उन्होंने सत्ता पक्ष से अपील करते हुए कहा कि सरकार को बंद कमरे में बैठने के बजाय सदन में आकर विपक्ष की बात सुननी चाहिए और सवालों का जवाब देना चाहिए।