Tuesday, July 16, 2024
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उत्तराखंड: पर्वतीय क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी से चरमरा रहीं हैं स्वास्थय सेवाएं

उत्तराखंड में आम आदमी को बेहतर इलाज आखिर कैसे मिलेगा जब यहां ग्रामीण इलाकों में विशेषज्ञ डाक्टरों का अभाव होगा। एक तरफ सरकार स्वास्थय सेवाओं को लेकर बड़े बड़े दावे करती है। तो दूसरी तरफ उत्तराखंड में स्वास्थय सेवाओं के विषय पर व्यवस्थाएं चरमरा रहीं हैं। राज्य में अस्पताल तो हैं लेकिन उसमे मरीजों का इलाज करने के लिए डॉक्टर नहीं है। डॉक्टर की कमी के कारण सरकार नए फार्मूलों पर कार्य कर रही है। राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और चिकित्सालयों में डॉक्टरों की ड्यूटी को समय समय पर रोटेड करके बदला जाएगा । जबकि स्वास्थय विभाग ने विशेषज्ञ डाक्टरों के सेवा काल की अवधि 60 वर्ष से 65 वर्ष वर्ष तक की मंजूरी कैबिनेट को दे दी है । राज्य के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थय सेवाओं को लेकर डॉक्टरों की कमी के कारण यहां के आम जन मानस को समस्याओं का सामना करना पड़ता है जिसका अंजाम यहां के लोगों को कई बार बहुत महंगा भी पड़ता है। प्रदेश में सबसे ज्यादा कमी विशेषज्ञ डॉक्टरों की है। प्रदेश सरकार ने संविदा पर विशेषज्ञ डॉक्टरों को प्रति माह चार से छह लाख रुपये तक मानदेय देने को भी तैयार है। इसके बाद भी डॉक्टर नहीं मिल रहे हैं। अब विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए सेवा के लिए आयु सीमा 65 साल किया गया है।पर्वतीय जिलों में डॉक्टरों के न होने के कारण मरीजों को इलाज की सुविधा नहीं मिल रही है। अब इस समस्या के लिए प्रदेश सरकार फार्मूला तैयार किया है। जिन क्षेत्रों में जहां डॉक्टर नहीं हैं, ऐसे क्षेत्रों में रोटेशन पर डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाएगी, जिससे लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो। वर्तमान में डॉक्टरों की आवश्यकता और कमी को लेकर गैप स्टडी कराकर योजना बनाने पर काम किया जा रहा है। डॉक्टरों के ठहरने के लिए आवासों की व्यवस्था कराई जाएगी। कोप

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