Saturday, February 4, 2023
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गंगा और ग्लेशियर को बचाने के लिए 21 साल से जुड़ी ग्लेशियर लेडी शांति ठाकुर

देहरादून: ग्लोबल वार्मिंग से लेकर प्रदूषण तक सभी कारक ग्लेशियर और गंगा के लिए नुकसानदेह रहे हैं. वही गंगा और ग्लेशियर को बचाने के लिए 21 साल पहले उत्तराखंड की बेटी शांति ठाकुर ने मुहिम शुरू की थी जो आज भी जारी है. विकास के लिए लगातार प्रकृति के साथ छेड़छाड़ करना मानव सभ्यता को भारी पड़ता दिख रहा है. हिमालय के वक्ष पर बर्फीले सफेद ग्लेशियर कभी धरती की खूबसूरती की निशानी हुआ करते जो इंसानी दुनिया के लिए खतरा बनते नजर आ रहे हैं. प्रकृति को इंसान ने अपने लालच के लिए इस कदर जख्मी कर दिया है कि उसका भयानक और विकराल रूप केदारनाथ आपदा और रैणी आपदा के रूप में हम देख चुके हैं.

ग्लेशियर हमारी नदियों में पानी के स्रोत हैं तो वहीं नदियां हमारी आर्थिक रीढ़ और जीवन की आधार हैं. इसलिए इन्हें बचाने के लिए साल 2000 से उत्तराखंड की बेटी शांति ठाकुर ने मुहिम चलाई. बीते 21 वर्षों से गंगा- यमुना और हिमालय के अस्तित्व को बचाने के लिए शांति ठाकुर प्रयास कर रही है लोगों में जागरूकता लाने की कोशिशों में लगी हुई है.

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