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जोशीमठ में व्यावसायिक भवनों को लेकर बनाये गए 5 स्लैब, स्थायी पुनर्वास को लेकर रखे गये तीन विकल्प

देहरादून/जोशीमठ: उत्तराखंड कैबिनेट बैठक में जोशीमठ आपदा प्रभावितों की भूमि और भवनों के मुआवजे के साथ स्थायी विस्थापन को लेकर प्रस्तावित नीति को स्वीकृति दी गई है. आज मुख्यमंत्री सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम और आपदा प्रबंधन सचिव रंजीत कुमार सिन्हा ने जोशीमठ में विस्थापन और पुनर्वास नीति को लेकर जारी की गई मानकों पर स्थिति स्पष्ट की. इस दौरान उन्होंने पॉलिसी के कई बिंदुओं की विस्तार से जानकारी दी. बता दें कि 15 फरवरी को हुई उत्तराखंड कैबिनेट बैठक में जोशीमठ के लिए राहत पैकेज को मंजूरी दी गई थी. जिसके तहत जोशीमठ में व्यावसायिक भवनों को लेकर 5 स्लैब बनाए गए हैं, उसी हिसाब से भूमि का मुआवजा दिया जाना है. इसके अलावा स्थायी पुनर्वास को लेकर तीन विकल्पों को रखा गया है. इसी कड़ी में आज आपदा प्रबंधन सचिव और मुख्यमंत्री सचिव ने जोशीमठ में विस्थापन और पुनर्वास नीति की जानकारी दी.

जोशीमठ में विस्थापन और पुनर्वास नीति से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण बिंदुः जोशीमठ प्रभावितों के लिए क्षतिपूर्ति दर तय की गई है. जिसके तहत आवासीय भवनों के नुकसान पर 100% भुगतान किया जाएगा. ईंट से बने आवासीय भवन के लिए 31,031 रुपए प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से भुगतान किया जाएगा. जबकि, बीम और कॉलम के बने आवासीय भवनों के लिए 36,386 रुपए प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से दिया जाएगा.

वहीं, ईंट के बने व्यावसायिक भवनों के लिए 39,030 रुपए प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से भुगतान किया जाएगा. इसके अलावा बीम और कॉलम से बने व्यावसायिक भवनों के लिए 45,921 रुपए प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से भुगतान दिया जाएगा.

व्यावसायिक भवनों के लिए तय स्लैब
5 लाख तक के व्यावसायिक भवन को 100% भुगतान दिया जाएगा. जबकि, 5 से 15 लाख तक के व्यावसायिक भवन को 5 लाख रुपए तक पूरा भुगतान किया जाएगा. इससे ऊपर 40% भुगतान किया जाएगा. वहीं, 15 से 30 लाख तक के व्यावसायिक भवनों के लिए 15 लाख तक 9 लाख रुपए दिया जाएगा. उससे ऊपर 30% भुगतान किया जाएगा.

वहीं, 30 से 50 लाख तक के व्यावसायिक भवन के लिए, 30 लाख तक 30.5 लाख रुपए भुगतान किया जाएगा. इससे ऊपर 20% भुगतान किया जाएगा. 50 लाख से ऊपर के व्यावसायिक भवन के लिए 50 लाख तक 17.5 लाख भुगतान किया जाएगा, इससे ऊपर 10% भुगतान किया जाएगा.

आवासीय जमीन की क्षति पर मुआवजाः आवासीय जमीन की क्षति पर 75 वर्ग मीटर भूमि दी जाएगी. इससे अधिक की भूमि के नुकसान पर भूमि का मुआवजा दिया जाएगा. व्यवसाय जमीन के क्षति पर 15 वर्ग मीटर भूमि दी जाएगी. वहीं, किराए पर लेकर दुकान चला रहे प्रभावित को एकमुश्त 2 लाख रुपए दिए जाएंगे.

क्या बोले आपदा प्रबंधन सचिव
उत्तराखंड आपदा प्रबंधन सचिव रंजीत कुमार सिन्हा ने बताया कि जोशीमठ में विस्थापन और पुनर्वास नीति के तहत सभी मानक तय कर दिए गए हैं. जिसमें जोशीमठ के लोगों को किस तरह से विस्थापित किया जाना है, इसका भी जिक्र किया गया है. हालांकि, यह पूरी प्रक्रिया जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद शुरू हो पाएगी.

उन्होंने बताया कि जोशीमठ में कितना क्षेत्र आपदा प्रभावित है? यह भी टेक्निकल एजेंसी की रिपोर्ट में शामिल होगा. टेक्निकल एजेंसियों के गाइडलाइन के अनुसार ही प्रभावितों को भूमि आवंटित किया जाएगा. जोशीमठ में ऐसे लोग जिनके पास भूमि का कोई दस्तावेज नहीं है और भवन निर्माण किया है. ऐसे में उन्हें प्रभावित भवनों के बदले मुआवजा दिया जाएगा, लेकिन भूमि के बदले का मुआवजा नहीं दिया जाएगा.

पुनर्वास और विस्थापन के लिए तीन अधिकारी होंगे तैनात
वहीं, मुख्यमंत्री सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि उत्तराखंड में अब यात्रा सीजन शुरू होने वाला है. लिहाजा, जोशीमठ के पुनर्वास और विस्थापन में जिला प्रशासन अधिक व्यस्त न हो और चारधाम यात्रा के साथ-साथ पुनर्वास और विस्थापन का कार्य सुगमता से चलता रहे. इसके लिए तीन अधिकारियों को पुनर्वास और विस्थापन के कार्यों के लिए तैनात किया जाएगा. साथ ही एसडीएम की अध्यक्षता में ही पुनर्वास और विस्थापन होगा.

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