उत्तराखंड में आगामी चुनावों के मद्देनजर मतदाता सूचियों को त्रुटिहीन और पारदर्शी बनाने के लिए निर्वाचन विभाग ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। प्रदेश में चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत अब उन मतदाताओं पर विशेष फोकस किया जा रहा है, जिनके एसआईआर गणना प्रपत्र किसी कारणवश जमा नहीं हो पाए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने साफ किया है कि जिन मतदाताओं के प्रपत्र जमा नहीं हुए हैं, उनकी एक बार फिर से गहन जांच और घर-घर जाकर सत्यापन (वेरिफिकेशन) किया जाएगा, ताकि कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे।
देहरादून में सभी जिलाधिकारियों (डीईओ) और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ) के साथ आयोजित एक विशेष वर्चुअल समीक्षा बैठक में मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने काम की प्रगति का जायजा लिया। डॉ. पुरुषोत्तम ने सभी जिलों को निर्देश दिए कि जिन मतदाताओं को तकनीकी या अन्य कारणों से 'अनकलेक्टेबल' (असंग्रहणीय) श्रेणी में डाल दिया गया है, उन्हें सीधे बाहर करने के बजाय एक बार फिर उनका भौतिक सत्यापन सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जिन जनपदों में फॉर्म डिजिटाइजेशन का कार्य लगभग शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है, वे अब बिना समय गंवाए मतदान केंद्रों (पोलिंग बूथों) के युक्तिकरण और पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू कर दें। सीईओ ने डीईओ और ईआरओ को एएसडी (अनुपस्थित, स्थानांतरित और मृत) मतदाताओं की सूची की बूथवार खुद समीक्षा करने की जिम्मेदारी सौंपी है, ताकि मतदाता सूची पूरी तरह शुद्ध हो सके। समीक्षा बैठक के दौरान सामने आया कि राज्य में निर्वाचन विभाग का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा है। प्रदेशभर में 99 प्रतिशत से अधिक गणना फॉर्मों का वितरण सफलतापूर्वक किया जा चुका है। वहीं, कुल डिजिटाइजेशन का कार्य भी 92 प्रतिशत से अधिक का आंकड़ा पार कर गया है। पहाड़ी जिलों ने इस अभियान में बाजी मारी है। अल्मोड़ा और चंपावत जिलों ने मिसाल पेश करते हुए एसआईआर गणना फॉर्मों के डिजिटाइजेशन का कार्य 100% पूरा कर लिया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने सभी जिलों की इस सामूहिक प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए जिलाधिकारियों और उनकी टीम को बधाई दी। इस महत्वपूर्ण बैठक में संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रकाश चंद्र दुम्का, उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी और सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास सहित तमाम प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। राज्य के दो सबसे बड़े और मैदानी जिलों देहरादून और हरिद्वार में डिजिटाइजेशन की रफ्तार पहाड़ी जिलों के मुकाबले थोड़ी धीमी रही है। यहाँ अभी तक केवल 88 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने इन मैदानी जनपदों को कार्यप्रणाली में तेजी लाते हुए जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

