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सपा नेता पर विवादित बयान का असर: लखनऊ और दिल्ली में छात्रों का उग्र प्रदर्शन

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नई दिल्ली। एक राष्ट्रीय समाचार चैनल पर लाइव टीवी डिबेट के दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर संगीत कुमार रागी और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज काका के बीच हुई तीखी नोकझोंक और जातिगत टिप्पणी को लेकर बवाल मच गया है। बहस के दौरान प्रोफेसर द्वारा की गई जातिगत और अमर्यादित टिप्पणियों के विरोध में बुधवार को दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ तक जोरदार प्रदर्शन हुए। दिल्ली में जहां प्रोफेसर के कार्यालय में तोड़फोड़ कर दीवारों पर गोबर पोता गया, वहीं लखनऊ में समाजवादी छात्र सभा के कार्यकर्ताओं ने उनका पुतला फूंककर कड़ा रोष जताया। पूरा विवाद मंगलवार शाम एक चैनल पर आयोजित डिबेट से शुरू हुआ। चर्चा के दौरान दोनों पैनेलिस्टों के बीच गरमागरमी इतनी बढ़ गई कि भाषाई संयम पूरी तरह टूट गया। प्रोफेसर संगीत रागी ने सपा प्रवक्ता मनोज काका को संबोधित करते हुए 'पार्टी का बेहूदा अहीर' कह दिया। इसके जवाब में मनोज काका ने उन्हें संवेदनहीन बताते हुए 'गंवार' कहा। इसके बाद तकरार और उग्र हो गई। प्रोफेसर रागी ने अमर्यादित शब्दों की झड़ी लगाते हुए सपा प्रवक्ता के लिए 'गंवार', 'गधा' और 'सूअर की औलाद' जैसे शब्दों का प्रयोग किया और कहा कि "गधे बोल नहीं पाते, केवल दासता करते हैं।" जवाब में मनोज काका ने सरकार की तरफदारी करने वालों पर कटाक्ष किया और कहा कि वे हर जाति का सम्मान करते हैं। इस पर पलटवार करते हुए रागी ने मनोज काका की भाषा को "गली के कुत्ते वाली भाषा" करार दे दिया। इस तीखी बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही व्यापक आक्रोश फैल गया, खासकर 'अहीर' शब्द के इस्तेमाल को लेकर लोगों ने सख्त आपत्ति जताई।

विरोध की आग: दिल्ली में दफ्तर पर हमला, लखनऊ में पुतला दहन
विवाद गहराने के बाद बुधवार को दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर में तनाव देखने को मिला। गुस्साए प्रदर्शनकारी राजनीति विज्ञान विभाग पहुंचे और प्रोफेसर संगीत रागी के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने उनके कार्यालय का मुख्य दरवाजा तोड़ दिया, भीतर घुसकर सामान बिखेर दिया और नेमप्लेट व दीवारों पर गोबर पोत दिया। इसके अलावा, छात्रों और प्रदर्शनकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय के कुलपति को ज्ञापन सौंपकर प्रोफेसर रागी को तुरंत निलंबित करने और कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की। उधर, लखनऊ में भी घटना की तीखी प्रतिक्रिया हुई। लखनऊ विश्वविद्यालय के गेट नंबर-3 पर समाजवादी छात्र सभा के कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने प्रोफेसर रागी की तस्वीरों को पैरों से रौंदा और उनका पुतला फूंका। हालांकि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने तुरंत जलते पुतले को अपने कब्जे में लेकर स्थिति को नियंत्रित किया। छात्र नेताओं ने चेतावनी दी कि एक शिक्षक द्वारा सार्वजनिक मंच पर किसी जाति विशेष के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

विवाद बढ़ता देख मांगी माफी
विवाद को तूल पकड़ता देख प्रोफेसर संगीत रागी ने मंगलवार देर शाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर सफाई जारी करते हुए माफी मांगी। उन्होंने लिखा कि सपा प्रवक्ता लगातार उन पर निजी हमले कर रहे थे और उन्हें 'बेहूदा' और 'गधा' कह रहे थे। रागी ने कहा कि गुस्से में उन्होंने जो शब्द कहे, उसमें 'अहीर' शब्द सहचर के तौर पर निकल गया। उनका इरादा पूरे समुदाय को ठेस पहुंचाने का नहीं था, बल्कि यह टिप्पणी केवल उन पर निजी हमले करने वाले व्यक्ति के लिए थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इससे किसी की भावना आहत हुई है, तो वे बिना शर्त माफी मांगते हैं।

कौन हैं मनोज काका और संगीत रागी?
चंदौली के महुरा गांव के किसान परिवार से आने वाले मनोज सिंह काका (मनोज सिंह यादव) लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र और गोल्ड मेडलिस्ट रहे हैं। उन्होंने कानून में एलएलएम, एमबीए और एमफिल किया है। छात्र राजनीति से शुरुआत कर वे सपा के राष्ट्रीय सचिव और प्रदेश उपाध्यक्ष रहे और वर्तमान में राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। वहीं, प्रो. संगीत कुमार रागी दिल्ली विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में वरिष्ठ प्राध्यापक और पूर्व विभागाध्यक्ष हैं। वे संघ (RSS) के वैचारिक दृष्टिकोण से जुड़े चिंतक माने जाते हैं और भारतीय राजनीति, लोक प्रशासन व राजनीतिक चिंतन पर अध्यापन के साथ-साथ टीवी चैनलों पर प्रमुख राजनीतिक विश्लेषक के रूप में सक्रिय रहते हैं।