Apr 02, 2026

उच्च ऊंचाई वाले हिमालयी मंदिर स्थलों पर हृदय संबंधी आपात स्थितियों को रोकने के लिए हृदय रोग विशेषज्ञों द्वारा अनुकूलन पर जोर

post-img

देहरादून। उत्तराखंड की पावन चारधाम यात्रा इस वर्ष 19 अप्रैल से शुरू होने जा रही है। यात्रा को आस्था के साथ-साथ पूरी तरह सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए सरकार और संबंधित विभाग सक्रियता से तैयारियां कर रहे हैं। इसी क्रम में हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय द्वारा लोकभवन में “चारधाम यात्रा के दौरान चिकित्सा समस्याएं और सड़क दुर्घटना सुरक्षा उपाय” विषय पर एक महत्वपूर्ण सेमिनार का आयोजन किया गया।सेमिनार में स्वास्थ्य विशेषज्ञों, चिकित्सकों और प्रशासनिक अधिकारियों ने चारधाम यात्रा के दौरान आने वाली स्वास्थ्य चुनौतियों, ऊंचाई से संबंधित बीमारियों (हाई एल्टीट्यूड सिकनेस) और सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम पर विस्तृत चर्चा की।

राज्यपाल गुरमीत सिंह ने सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा कि चारधाम यात्रा पर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और जीवन रक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “आस्था के साथ सावधानी चारधाम यात्रा का मूलमंत्र होना चाहिए।” राज्यपाल ने यात्रियों से अपील की कि वे यात्रा पर आने से पहले अपना पूर्ण स्वास्थ्य परीक्षण अवश्य करा लें, खासकर बुजुर्गों और गंभीर रोगियों को चिकित्सकीय सलाह लेकर ही यात्रा करनी चाहिए।राज्यपाल ने पर्वतीय मार्गों की सुंदरता के साथ उनकी संवेदनशीलता की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि ये मार्ग दुर्घटनाओं के जोखिम से भरे हैं, इसलिए यात्रियों और चालकों दोनों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। उन्होंने सड़क दुर्घटनाओं में ‘गोल्डन आवर’ के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि दुर्घटना के एक घंटे के अंदर उचित चिकित्सा सहायता मिलने से कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। इसके लिए आपातकालीन चिकित्सा तंत्र को और मजबूत करने तथा ट्रॉमा केयर सेंटर विकसित करने की आवश्यकता बताई। सेमिनार के दौरान हृदय रोग विशेषज्ञ पद्मश्री प्रो. (डॉ.) एस.सी. मनचंदा ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुरक्षा के महत्वपूर्ण टिप्स साझा किए। उन्होंने कहा कि यात्रा शुरू करने से पहले स्वास्थ्य जांच अनिवार्य है। ऊंचाई पर धीरे-धीरे चढ़ाई करें और पहले 1-2 दिन कम ऊंचाई वाले स्थान पर रुककर शरीर को अनुकूलित (acclimatize) होने का समय दें। डॉ. मनचंदा ने यात्रियों को सलाह दी कि वे यात्रा के दौरान नियमित रूप से पल्स ऑक्सीमीटर और ब्लड प्रेशर की जांच करते रहें, दवाइयों का सेवन समय पर करें और किसी भी असामान्य लक्षण जैसे सिरदर्द, सांस फूलना, उल्टी या चक्कर आने पर तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। उन्होंने मानसिक शांति के लिए योग और ध्यान को भी उपयोगी बताया।

मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी के डॉ. पंकज ने पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने सुरक्षित ड्राइविंग, ओवरस्पीडिंग न करने, मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करने और मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर यात्रा करने पर जोर दिया। डॉ. पंकज ने दुर्घटना के बाद तत्काल दिए जाने वाले प्राथमिक उपचार  की जानकारी दी और कहा कि सही समय पर प्राथमिक उपचार कई बार गंभीर स्थिति को नियंत्रित कर जान बचा सकता है। एम्स गोरखपुर के ऑर्थोपेडिक विभाग के एचओडी डॉ. आशुतोष तिवारी ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों में होने वाली न्यूरोलॉजिकल समस्याओं पर विस्तृत प्रकाश डाला। सेमिनार के दौरान चारधाम यात्रा को और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से “पिलग्रिमेज एजुकेशन हैंडबुक” का विमोचन भी किया गया। इस पुस्तक में यात्रा के दौरान यात्रियों द्वारा बरती जाने वाली सावधानियां, स्वास्थ्य संबंधी जोखिम, सड़क सुरक्षा नियम और आपात स्थिति में क्या करना चाहिए, इन सभी बिंदुओं की विस्तृत जानकारी दी गई है। सेमिनार में उपस्थित विशेषज्ञों ने एकमत से कहा कि चारधाम यात्रा केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का भी प्रतीक है। यात्रियों को अपनी और दूसरों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखना चाहिए। इस आयोजन को चारधाम यात्रा की तैयारियों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सेमिनार को सफल बनाने के लिए सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।