पर्यटन और डेयरी क्षेत्रों में अग्रणी परियोजनाएं आज आत्मनिर्भर उत्तराखंड मिशन की नींव को मजबूत कर रही हैं

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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड 'स्वरोजगार' के क्षेत्र में एक नई इबारत लिख रहा है। राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से अब तक 35,000 से अधिक लोगों को ऋण वितरित कर प्रदेश में 64,966 से अधिक नए रोजगार के अवसर सृजित किए गए हैं। पर्यटन, सौर ऊर्जा, डेयरी और कृषि आधारित उद्योगों में आई इस क्रांति ने न केवल युवाओं को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि पलायन रोकने में भी मदद की है। 'मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना' युवाओं के लिए वरदान साबित हो रही है। इस योजना के तहत विनिर्माण इकाइयों के लिए ₹25 लाख तक और सेवा व व्यापार के लिए ₹10 लाख तक के ऋण पर 15 से 25 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है। इससे युवा नौकरी मांगने वाले के बजाय नौकरी देने वाले बन रहे हैं। मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के माध्यम से पर्वतीय क्षेत्रों में 2,42,120 KW से अधिक क्षमता के सौर संयंत्रों की प्रक्रिया जारी है, जिससे बंजर जमीन आय का जरिया बन रही है। पर्यटन में उछाल: साल 2021-22 में होमस्टे की संख्या 3,935 थी, जो 2024-25 में बढ़कर 6,161 हो गई है। यह ग्रामीण स्तर पर अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है। महिलाएं अब स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्थानीय उत्पादों जैसे भट के डुबके, झोली और हस्तशिल्प को बढ़ावा देकर सशक्त हो रही हैं। वहीं, सिडकुल में मेडिकल डिवाइस पार्क जैसे उपक्रमों ने स्थानीय कौशल को नए पंख दिए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, स्वरोजगार की इन पहलों का असर राज्य की बेरोजगारी दर पर भी पड़ा है। 15-29 आयु वर्ग में बेरोजगारी दर 14.2% से घटकर 9.8% पर आ गई है। यह गिरावट सीधे तौर पर दर्शाती है कि धामी सरकार की नीतियां धरातल पर सफल हो रही हैं। मुख्यमंत्री धामी का "आत्मनिर्भर उत्तराखंड" का लक्ष्य अब हकीकत में बदल रहा है। सरकार का संकल्प है कि अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक इन योजनाओं का लाभ पहुंचे ताकि देवभूमि का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।