Mar 13, 2026

घटिया गुणवत्ता और मिलावट के खिलाफ प्रहार: हॉट बाजारों में औचक निरीक्षण कर भरे जाएंगे खाद्य पदार्थों के सैंपल

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खाद्य पदार्थों में मिलावट से कैंसर का कारण बन रहे रसायनों को चिह्नित करने के लिए नियमावली बनाई जाएगी। इसके अलावा प्रदेश के हर महीने मिलावट व घटिया गुणवत्ता की जांच के लिए एक सप्ताह का अभियान चलाया जाएगा। प्रदेश में लगने वाले हॉट बाजारों में भी खाद्य पदार्थों की सैंपल जांच की जाएगी।

विधानसभा सत्र के चौथे दिन बृहस्पतिवार को प्रश्नकाल में भाजपा विधायक बृजभूषण गैरोला के सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि कैंसर मरीजों की संख्या बढ़ रही है। खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए सरकार की ओर से प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर सैंपल एकत्रित जांच की जा रही है। कैंसर का कारण बन रहे रसायनों को चिन्हित करने के लिए सरकार नियमावली बनाएगी। भाजपा विधायक प्रेमचंद अग्रवाल ने सवाल किया त्योहारों के मौके पर एफडीए की ओर से निरीक्षण कर सैंपल भरे जाते हैं। मिलावट को रोकने के लिए नियमित रूप से जांच होनी चाहिए। इस पर स्वास्थ्य मंंत्री ने कहा कि यह सही बात है कि त्योहारों के मौके पर विभाग ज्यादा सक्रिय होता है। सरकार की ओर से प्रत्येक माह एक सप्ताह तक प्रदेश में खाद्य पदार्थों के सैंपल लेने के लिए अभियान चलाया जाएगा। इसके अलावा प्रदेश में लगने वाले हॉट बाजारों में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की जांच की जाएगी। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, खाद्य पदार्थों के सैंपलों की जांच के लिए देहरादून में लैब बनाई जा रही है। 31 मार्च 2026 तक प्रयोगशाला बनकर तैयार हो जाएगी। इसके बाद सैंपलों की जांच में तेजी आएगी। खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग में 28 खाद्य सुरक्षा अधिकारी 28 पदों पर भर्ती का प्रस्ताव लोक सेवा आयोग को भेजा गया है। जब तक इन पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती है। तब तक दूसरे विभागों से प्रतिनियुक्ति पर अधिकारियों को तैनात करने पर विचार किया जाएगा। भाजपा विधायक विनोद चमोली ने सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा वर्तमान में एफडीए की ओर से खाद्य पदार्थों के सैंपल लेकर जांच को भेजे जाते हैं। निकायों को भी सैंपल लेने व निरीक्षण का अधिकार देने पर नीतिगत निर्णय लेने पर विचार किया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि वर्ष 2023-24 व 2024-25 में कुल 3311 सैंपल जांच के लिए भेजे गए। इसमें 330 सैंपल गुणवत्ता मानकों में फेल पाए गए। फेल सैंपलों में निर्माता व विक्रेता के खिलाफ मुकदमा दायर किया गया है।