पर्वतीय जिलों के विकास को नया बूस्टर, औषधीय पौधों के जरिए ग्रामीण आर्थिकी सुधारने का महाअभियान

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देहरादून। उत्तराखंड के पारंपरिक कृषि क्षेत्र को मुनाफे के बिजनेस में बदलने और किसानों की आर्थिकी को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने एक बेहद महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश को देश का प्रमुख 'एरोमा हब' (सुगंधित तेल और औषधि केंद्र) बनाने के लिए ऐतिहासिक 'महक क्रांति नीति-2026' को धरातल पर उतार दिया गया है। इस नई नीति के तहत राज्य के करीब 91 हजार किसानों को सीधे सगंध खेती से जोड़कर उनकी आमदनी को दोगुना करने का विशाल लक्ष्य रखा गया है।

यह महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदेश के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने सेलाकुई स्थित परफ्यूमरी एवं सगंध अनुसंधान एवं विकास संस्थान में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के दौरान साझा कीं। कार्यक्रम में कृषि मंत्री ने कार्यशाला की विशेष स्मारिका का विमोचन किया और देश-विदेश से आए वैज्ञानिकों व प्रतिनिधियों को सम्मानित भी किया। कृषि मंत्री गणेश जोशी ने बताया कि उत्तराखंड की विशिष्ट जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियां औषधीय व सगंध पौधों की खेती के लिए ईश्वरीय वरदान की तरह हैं। इसी का लाभ उठाने के लिए चंपावत और नैनीताल जिलों के लगभग 5200 हेक्टेयर क्षेत्र को मिलाकर एक विशेष “सिनेमन वैली” (दालचीनी घाटी) विकसित की जा रही है। इस दूरदर्शी परियोजना के माध्यम से दालचीनी की व्यावसायिक खेती और उसके प्रसंस्करण को विश्वस्तरीय बढ़ावा मिलेगा, जिससे न केवल स्थानीय किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि नए उद्यमियों के लिए स्वरोजगार के बंपर अवसर पैदा होंगे। पहाड़ों से हो रहे पलायन पर चिंता व्यक्त करते हुए कृषि मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि इस मुहिम का लाभ पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों के आखिरी छोर पर बैठे किसान तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने वन विभाग के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर फॉरेस्ट लैंड के आसपास के बफर क्षेत्रों में भी सगंध पौधों की खेती को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगली जानवरों से सुरक्षित रहने वाली इस खेती से पहाड़ों में बंजर हो रही जमीनों का सदुपयोग होगा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और युवाओं का पलायन थमेगा। कृषि मंत्री ने सगंध पौधा केंद्र (कैप) की पीठ थपथपाते हुए कहा कि पिछले दो दशकों (20 साल) में इस संस्थान ने उत्तराखंड को एक नई वैश्विक पहचान दी है। शोध, ट्रेनिंग और नई तकनीकों के माध्यम से वैज्ञानिकों ने लैवेंडर, लेमनग्रास और दालचीनी जैसी फसलों को किसानों के खेतों तक पहुंचाया है। सेमीनार के अंत में कृषि मंत्री ने संस्थान परिसर में औषधीय और सगंध पौधों से तैयार विभिन्न हर्बल उत्पादों, परफ्यूम और एसेंशियल ऑयल्स के स्टॉल्स का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने उत्पादों की शानदार गुणवत्ता की सराहना करते हुए भरोसा जताया कि यह अंतरराष्ट्रीय सेमिनार उत्तराखंड की सुगंध को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में मील का पत्थर साबित होगा।