Thursday, May 23, 2024
No menu items!
Google search engine
HomeUncategorizedनवीकरण ऊर्जा परियोजना के लिए इरेडा और आईआईएफसीएल अब करेंगे...

नवीकरण ऊर्जा परियोजना के लिए इरेडा और आईआईएफसीएल अब करेंगे साथ मे काम ……


भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी लिमिटेड (इरेडा) ने नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी लिमिटेड (आईआईएफसीएल) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता ज्ञापन इरेडा और आईआईएफसीएल को लघु जल-विद्युत परियोजनाओं सहित नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की सभी श्रेणियों के लिए सह-ऋण/सह-उत्पत्ति और ऋण सिंडिकेट में जुड़ने के लिए सशक्त बनाएगा। दोनों संगठन तीन से चार साल की अवधि के लिए इरेडा उधार के लिए ब्याज दरें भी तय करने का प्रयास करेंगे। इसके अलावा, आईआईएफसीएल, इरेडा द्वारा जारी बांड में, बांड के नियमों और शर्तों के अनुसार, निवेश कर सकता है।

इरेडा के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक प्रदीप कुमार दास तथा आईआईएफसीएल के प्रबंध निदेशक श्री पी आर जयशंकर ने आज, 4 सितंबर, 2023 को एमओयू पर हस्ताक्षर किए।

इस अवसर पर सीएमडी, इरेडा ने कहा: “हम आईआईएफसीएल के साथ साझेदारी करके प्रसन्न हैं और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के विकास के लिए आईआईएफसीएल को अपनी तकनीकी-वित्तीय विशेषज्ञता की पेशकश करते हैं। इस सहयोग से, हम भारत सरकार के लक्ष्य -वर्ष 2030 तक अपनी ऊर्जा के 50 प्रतिशत हिस्से का गैर-जीवाश्म ईंधन से उत्पादन- का समर्थन करने में सक्षम होंगे। हमें विश्वास है कि एक साथ काम करके, हम अपनी ताकत का लाभ उठाएंगे और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण तथा एक स्वच्छ और हरित भारत के अनुरूप अपने ग्राहकों की सेवा करना जारी रखेंगे।”


आरई क्षेत्र में बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए इरेडा ने दो साल पहले एक विशिष्ट व्यवसाय विकास और परामर्श प्रभाग की स्थापना की थी। इरेडा ने पहले भी अन्य केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता ज्ञापन, इरेडा की हरित वित्तपोषण विशेषज्ञता और आईआईएफसीएल की अवसंरचना वित्तपोषण विशेषज्ञता के बीच तालमेल को सक्षम करेगा।

भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी लिमिटेड (इरेडा), नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के तहत एक सार्वजनिक उपक्रम है और इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी लिमिटेड (आईआईएफसीएल), भारत सरकार की एक पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है, जिसे 2006 में व्यावहारिक अवसंरचना परियोजनाओं को दीर्घकालिक वित्तीय सहायता सेवाएं प्रदान करने के लिए स्थापित किया गया था।

सम्बंधित खबरें
- Advertisment -spot_imgspot_img

ताजा खबरें